दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी डिसेबिलिटी के खिलाफ भोपाल के युवाओं की जंग, तैयार किया कर्णबधिर बच्चों के लिए देश का पहला फ्री AI प्लेटफॉर्म

Updated on 08-06-2026 02:23 PM

भोपाल। दुनिया में बधिरता (Deafness) दूसरी सबसे बड़ी दिव्यांगता मानी जाती है। आंकड़ों के अनुसार विश्वभर में करीब 34 लाख और भारत में 20 लाख से अधिक बच्चे श्रवण बाधित (कर्णबधिर) हैं। ऐसे बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा की होती है।

पढ़ाई के अनुकूल माहौल और उपयुक्त शिक्षण पद्धति के अभाव में बड़ी संख्या में बच्चे मिडिल स्कूल के बाद शिक्षा छोड़ देते हैं।

इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से भोपाल के युवा उद्यमी प्रबोध महाजन और अमनप्रीत चौपड़ा ने वर्ष 2020 में ‘लर्न एंड इम्पॉवर’ स्टार्टअप की शुरुआत की। यह एआई आधारित, पूरी तरह निःशुल्क और साइन लैंग्वेज समर्थित शिक्षण मंच है, जो कर्णबधीर बच्चों को आसान, रोचक और प्रभावी तरीके से शिक्षा उपलब्ध करा रहा है।

गेम-बेस्ड लर्निंग से आसान हुई पढ़ाई

अमनप्रीत चौपड़ा बताते हैं कि इंजीनियरिंग के दौरान उनकी मुलाकात एक कर्णबधिर छात्र और उसके अभिभावक से हुई थी। तब उन्हें एहसास हुआ कि आज भी बड़ी संख्या में डेफ बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंच से दूर है।
अधिकांश बच्चे सातवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं क्योंकि जटिल विषयों को समझाने के लिए उपयुक्त संसाधनों का अभाव होता है।
इसी अनुभव ने उन्हें ऐसा प्लेटफॉर्म विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जहां बच्चे वीडियो, विजुअल कंटेंट और इंटरैक्टिव गेम्स के माध्यम से खेल-खेल में पढ़ाई कर सकें। इससे कठिन विषयों को समझना आसान हो जाता है और बच्चों पर पढ़ाई का दबाव भी कम महसूस होता है।

छह महीने की रिसर्च के बाद तैयार हुआ मॉडल

स्टार्टअप शुरू करने से पहले दोनों संस्थापकों ने करीब छह महीने तक गहन शोध किया। उन्होंने कर्णबधिर बच्चों के स्कूलों का दौरा किया, शिक्षण पद्धतियों का अध्ययन किया और साइन लैंग्वेज विशेषज्ञों, शिक्षकों तथा अभिभावकों से बातचीत कर बच्चों की वास्तविक जरूरतों को समझा।
रिसर्च के आधार पर तैयार किए गए इस मॉडल का उद्देश्य केवल तकनीक विकसित करना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान देना था जो वास्तव में बच्चों की सीखने की प्रक्रिया को आसान बना सके।

शिक्षक और अभिभावक भी उठा रहे लाभ

प्रबोध महाजन के अनुसार शुरुआती दौर में डेफ एजुकेशन और एजुकेशन टेक्नोलॉजी को समझना चुनौतीपूर्ण था। एक बार उन्होंने देखा कि एक कर्णबधिर छात्र मोबाइल गेम के जरिए पढ़ाई समझने का प्रयास कर रहा है। इसी अनुभव से उन्हें विजुअल कंटेंट और गेमिफिकेशन की ताकत का अंदाजा हुआ।
आज प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कंटेंट इस तरह तैयार किया गया है कि बच्चे, शिक्षक और अभिभावक सभी इसका उपयोग कर सकें। इससे घर और स्कूल दोनों जगह एक समान शिक्षण वातावरण तैयार हो रहा है।

21 राज्यों के 30 हजार से अधिक उपयोगकर्ता

‘लर्न एंड इम्पॉवर’ का लक्ष्य हर कर्णबधीर बच्चे तक सुलभ और रोचक शिक्षा पहुंचाना है, ताकि कोई भी बच्चा केवल समझ की कठिनाई के कारण पढ़ाई न छोड़े। अब तक भारत के 21 राज्यों के 30 हजार से अधिक कर्णबधीर बच्चे और युवा इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर चुके हैं।
इसके लिए आईआईटी हैदराबाद और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद ने भी फंडिंग और सपोर्ट दिया है।


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