केविएट के बाद भी हाईकोर्ट की राहत: PWD की EE गुरमीत कौर का निलंबन स्टे, सरकार को झटका

Updated on 06-05-2026 09:55 PM

         ( संजय रायजादा )

भोपाल ।  मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग में इंदौर सेतू संभाग में नियमों को दरकिनार करके  30 करोड़ का टेंडर देने में हुए कथित घोटाले के आरोप को लेकर बड़ा उलटफेर हो गया है। सरकार ने इस मामले में हफ्ते भर पहले इंदौर सेतू संभाग की प्रभारी एक्जीक्यूटिव इंजीनियर गुरमीत कौर भाटिया को निलंबित कर दिया था और अदालत में यह मामला जाने की आशंका से  हाईकोर्ट में  केविएट दाखिल कर दी थी। इसके बावजूद आज बुधवार को हाईकोर्ट ने इंदौर सेतु संभाग की एक्जीक्यूटिव इंजीनियर गुरमीत कौर भाटिया के निलंबन आदेश पर स्टे लगा दिया । 

    29 अप्रैल को विभाग के अपर सचिव संजीव श्रीवास्तव ने सुश्री भाटिया पर अनियमिताओं का आरोप लगाते हुए निलंबित कर दिया था। उनके द्वारा जारी पत्र में आरोप था कि EE गुरमीत कौर भाटिया ने मेसर्स राजेश शर्मा इंफ्रास्ट्रक्चर भोपाल को नियमों को दरकिनार कर *30 करोड़ रुपए का टेंडर* दे दिया। 

यह मामला उछलने पर सरकार ने 

MPRDC के चीफ इंजीनियर बीपी बौरासी और मुख्य अभियंता आनंद प्रकाश राणे की कमेटी से जांच कराई थी। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट  में इंदौर  की प्रभारी EE सुश्री भाटिया को अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार ठहराया  था।


हाईकोर्ट में क्या हुआ  


गुरमीत कौर ने निलंबन को हाईकोर्ट में चुनौती दी। हालांकि सरकार ने केविएट दाखिल कर रखी थी ताकि बिना उसका पक्ष सुने स्टे न हो। सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि जांच रिपोर्ट एकतरफा है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं हुआ। 

दोनों पक्ष सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि प्रथम दृष्टया निलंबन में जल्दबाजी दिखती है। कोर्ट ने निलंबन आदेश के क्रियान्वयन पर *अगले आदेश तक रोक* लगा दी और सरकार से 4 सप्ताह में जवाब मांगा है।


हाईकोर्ट के स्टे के बाद प्रभारी EE गुरमीत कौर भाटिया फिलहाल पद पर बनी रहेंगी। अब निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय भोपाल करने का आदेश भी प्रभावी नहीं होगा।  

PWD को अब अदालत में अपने जवाब में यह साबित करना होगा कि 30 करोड़ का टेंडर नियम विरुद्ध कैसे दिया गया जबकि मामला संज्ञान में आने के बाद उच्च स्तर से टैंडर निरस्त किया जा चुका था। विभाग को यज्ञ भी बताना होगा कि घपले के आरोप में जिस टैंडर की पूरी प्रक्रिया ही निरस्त हो चुकी हो उसमें सुश्री भाटिया का निलंबन क्यों जरूरी था।  

     इस स्टे के बाद PWD में हड़कंप है। विभागीय अफसरों का मानना है कि अब हर निलंबन से पहले ठोस ग्राउंड और पूरी जांच जरूरी होगी, वरना कोर्ट से इसी तरह लोगों को राहत मिलती रहेगी।



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