'तुम्हारे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाए...', बशीर बद्र की गजलों से महकी भोपाल की शाम, मंत्रमुग्ध हुए श्रोता

Updated on 30-05-2026 01:38 PM

भोपाल। आरसीवीपी. नरोन्हा प्रशासन व प्रबंधकीय अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में शुक्रवार को आयोजित ''बज्म-ए-गजल'' संगीत, शायरी और भावनाओं का ऐसा संगम बन गया, जिसने श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध रखा। प्रसिद्ध गायक, संगीतकार और कंपोजर टीएस. धर्मेश ने अपनी मधुर आवाज और प्रभावशाली प्रस्तुति से गजल प्रेमियों को यादगार शाम का उपहार दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत मशहूर शायर बशीर बद्र की चर्चित पंक्तियों ''कभी यूं भी आ मेरी आंख में कि मेरी नजर को खबर न हो'' तथा ''आसमान से चांद उतरे, जाम हो जाए, तुम्हारे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाए'' से हुई।इन रूमानी और संवेदनशील प्रस्तुतियों ने शुरुआत से ही ऐसा समां बांधा कि पूरा सभागार गजलों की खुमारी में डूब गया।

करीब तीन दशकों से संगीत निर्देशन और गायन के क्षेत्र में सक्रिय टीएस. धर्मेश ने अपने अनुभव और कला का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

उन्होंने मुंबई और भोपाल में अनेक प्रतिष्ठित परियोजनाओं पर काम किया है। वे इंडियन आइडल सीजन-14 में मेंटरशिप की भूमिका निभा चुके हैं तथा फिल्म चौसर फिरंगी के संगीतकार भी रहे हैं। अब तक वे तीन सौ से अधिक गीतों, सौ से अधिक जिंगल्स और लगभग सौ नाटकों और वृत्तचित्रों के लिए संगीत तैयार कर चुके हैं।

टीएस. धर्मेश को श्रोताओं ने खूब सराहा

अपनी पत्नी और संगीतकार श्रुति धर्मेश के साथ वे पिछले 28 वर्षों से ''द राइट एंगल'' प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से सक्रिय हैं। कार्यक्रम में धर्मेश ने प्रसिद्ध शायर राहत इंदौरी की लिखी अपनी स्वरचित गजल ''लोग हर मोड़ पर रुक-रुक के संभलते क्यों हैं, इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं'' को बेहद प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

इसके अलावा उन्होंने ''तुमको देखा तो ये ख़याल आया'', ''तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो'', ''दिल ढूंढ़ता है फिर वही फुर्सत के रात-दिन'' और ''एक अकेला इस शहर में'' जैसी लोकप्रिय गजलों और गीतों को भी अपनी आवाज दी।

गजल सम्राट गुलाम अली की चर्चित गजलें ''चुपके-चुपके रात-दिन आंसू बहाना याद है'' और ''दिल में एक लहर सी उठी है अभी'' ने शाम को और भी यादगार बना दिया। कार्यक्रम में सिंथेसाइजर पर करण मुरझानी, तबले पर ऋषि मालवीय और गिटार पर गीतेंद्र श्रीवास्तव ने शानदार संगत कर प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया।

सांस्कृतिक प्रभारी डा. अनुपमा रावत ने कार्यक्रम का संचालन किया। पूरे आयोजन के दौरान श्रोताओं की तालियों और ‘वाह-वाह’ की गूंज सभागार में सुनाई देती रही। संगीत और शायरी से सजी यह शाम लंबे समय तक श्रोताओं की स्मृतियों में बनी रहेगी।



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