अब गर्भावस्था में महिला की मौत का कारण आएगा सामने

Updated on 10-04-2026 11:59 AM
 भोपाल, एमपी मातृ और शिशु स्वास्थ्य के मामले में देश के सबसे पीछे रहने वाला राज्य है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में हर एक लाख प्रसव में 159 माताएं और हर एक हजार जन्म में 40 नवजात अपनी जान गंवा रहे हैं। ये आंकड़े सिर्फ एक नंबर नहीं, बल्कि उन परिवारों की पीड़ा हैं जो समय पर इलाज, संसाधन और सुरक्षित प्रसव सुविधाओं के अभाव में अपनों को खो देते हैं।

यही नहीं कई बार मौत की असली वजह सामने नहीं आ पाती, जिससे सुधार के ठोस कदम भी नहीं उठ पाते। अब इसी चुनौती से निपटने के लिए एम्स भोपाल ने एक अहम पहल शुरू की है। यहां गर्भावस्था या प्रसव के दौरान हुई महिलाओं की मौत के मामलों में क्लिनिकल ऑटोप्सी की सुविधा दी जा रही है, जिससे मौत की असली वजह सामने लाई जा सके।

खास बात यह है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह फ्री है और इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती। परिवार की सहमति से होने वाली इस जांच से न केवल परिजनों को सच्चाई पता चलती है, बल्कि सरकार को भी ऐसा डेटा मिलता है, जिससे भविष्य में मातृ मृत्यु को कम करने की रणनीति तैयार की जा सके।

AIIMS Bhopal के डॉक्टरों के अनुसार, मध्यप्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां मातृ मृत्यु के मामले अपेक्षाकृत अधिक हैं। मातृ मृत्यु का मतलब है कि गर्भावस्था के दौरान, प्रसव के समय या गर्भसमापन के 42 दिनों के भीतर महिला की मौत। ऐसे मामलों को रोकना सरकार की बड़ी जिम्मेदारी होती है।

अब मौत के कारणों की होगी सटीक पहचान इन मामलों में मौत की असली वजह साफ नहीं हो पाती। ऐसे में एम्स भोपाल में क्लिनिकल ऑटोप्सी के जरिए वैज्ञानिक तरीके से कारणों की जांच की जा रही है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन सी मौत रोकी जा सकती थी और किन मामलों में स्थिति गंभीर थी।

यह प्रक्रिया मेडिको-लीगल ऑटोप्सी से अलग होती है। इसमें पुलिस की जरूरत नहीं होती और यह परिवार के अनुरोध पर की जाती है। इसमें शरीर के जरूरी हिस्सों की जांच कर बीमारी या जटिलता की सही वजह पता की जाती है।

परिवार को मिलती है पूरी जानकारी

ऑटोप्सी के बाद डॉक्टर हिस्टोपैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी रिपोर्ट तैयार करते हैं। कुछ ही दिनों में यह रिपोर्ट परिवार को दी जाती है। इससे परिजनों को यह समझने में मदद मिलती है कि मौत क्यों हुई और कोई लापरवाही तो नहीं हुई।

इस पहल से सरकार को मातृ मृत्यु के मामलों का सटीक और प्रमाणिक डेटा मिलेगा। इसके आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, सुविधाओं की कमी और इलाज की खामियों को पहचान कर बेहतर रणनीति बनाई जा सकेगी।

इसलिए जरूरी यह प्रक्रिया SRS मैटरनल बुलेटिन 2020-22 के अनुसार, मध्यप्रदेश में मातृ मृत्यु दर (MMR) 159 है। जबकि भारत का औसत MMR 88 है। मध्यप्रदेश का IMR-MMR देश के औसत से लगभग दोगुना है। जो इसे सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला राज्य बनाता है।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 29 August 2026
भोपाल, रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में 9 माह की गर्भवती कल्पना मिश्रा और उसके गर्भस्थ शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत से कुछ घंटे पहले कल्पना प्रसूति…
 29 August 2026
भोपाल, मध्य प्रदेश में जल्द ही करीब 10 हजार शिक्षकों की भर्ती निकलने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।…
 29 August 2026
भोपाल, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के मौके पर भोपाल में भारतीय संस्कृति और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विविधा कलायम सांस्कृतिक समिति की ओर से 1…
 29 August 2026
भोपाल। भोपाल शहर के बीच 200 से अधिक राष्ट्रीय पक्षी मोरों के प्राकृतिक बसेरे को मोरों पर केंद्रित देश के सबसे बड़े एकीकृत बायोडायवर्सिटी पार्क की योजना तैयार की गई…
 29 August 2026
भोपाल। नेपाल स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोसाईकुंड की धार्मिक यात्रा पर गए एक ही कुनबे के 29 श्रद्धालुओं के अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में लापता होने का हृदयविदारक…
 29 August 2026
 भोपाल। भोपाल सेंट्रल जेल ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के लिए खास इंतजाम किए, जिसके तहत बहनें जेल परिसर के अंदर अपने भाइयों से मिल सकीं और उन्हें राखी बांध सकीं।…
 29 August 2026
भोपाल। राजगढ़ के ब्यावरा में पुल के तीखे मोड़ ने चार यात्रियों की जान ले ली। इस दुर्घटना ने राजधानी के ऐशबाग में बने करीब 90 डिग्री मोड़ वाले पुल…
 29 August 2026
भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की ऐसी कोई भी नियुक्ति नहीं होती है, जिसे लेकर विवाद न हो। कई बार नियुक्ति निरस्त करनी पड़ती हैं तो कुछ को समायोजित करके…
 29 August 2026
भोपाल। महज 32,792 रुपये की वसूली का विवाद खत्म होने में 47 साल लग गए। वर्ष 1979 में एमपी स्टेट एग्रो और पीडी महेश्वरी के बीच शुरू हुआ यह मामला…
Advt.