MP में UCC की तैयारी तेज, CM मोहन यादव ने गृह विभाग को दिया 6 महीने का अल्टीमेटम, दिवाली तक लागू हो सकता है कानून

Updated on 09-04-2026 12:56 PM

मध्य प्रदेश की मोहन यादव सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। सरकार का लक्ष्य इस ऐतिहासिक कानून को इस साल दिवाली तक अमलीजामा पहनाने का है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गृह विभाग को अगले छह महीनों के भीतर विधेयक का मसौदा (Draft) तैयार करने का निर्देश दिया है।

इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए जल्द ही एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें कानूनी विशेषज्ञ, प्रशासनिक अधिकारी और विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति उत्तराखंड और गुजरात द्वारा लागू किए गए यूसीसी कानूनों का गहन अध्ययन करेगी।सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा, "देश के हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना अनिवार्य है। यूसीसी से राष्ट्र की एकता, अखंडता और बेहतर भविष्य सुनिश्चित होगा।"

शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की थी

दिसंबर 2022 में, तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश में UCC लागू करने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने का संकल्प लिया था। हालांकि, विधानसभा चुनावों की व्यस्तता के कारण यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई थी। अब मोहन यादव सरकार ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए उत्तराखंड मॉडल का विश्लेषण शुरू कर दिया है, जो 27 जनवरी 2025 से देश में UCC लागू करने वाला पहला राज्य बन चुका है।

क्या हैं यूसीसी की विशेषताएं?

1. लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण

UCC का सबसे क्रांतिकारी प्रभाव महिलाओं की स्थिति पर पड़ेगा। यह कानून धर्म से ऊपर उठकर सभी महिलाओं को समान अधिकार देता है। इसमें बेटियों को पिता की संपत्ति में बेटों के समान अधिकार प्राप्त होगा।

साथ ही तलाक की प्रक्रिया अब मजहबी परंपराओं के बजाय कानूनी और पारदर्शी होगी, जिससे महिलाओं का शोषण रुकेगा। इसके अलावा तलाक के बाद गुजारा भत्ता पाने के नियम सभी के लिए एक समान और स्पष्ट होंगे, जिससे महिलाओं का भविष्य सुरक्षित होगा।

2. वैवाहिक कुरीतियों पर अंकुश

एक से ज्यादा शादी करने की प्रथा पर पूर्ण प्रतिबंध लगेगा। यह नियम समाज में महिलाओं को बढ़ावा देगा। विवाह का अनिवार्य पंजीकरण होने से धोखाधड़ी और बाल विवाह जैसे मामलों में कमी आएगी।

UCC आधुनिक सामाजिक बदलावों को भी कानून के दायरे में लाता है। इसके तहत लिव-इन में रहने वाले जोड़ों को जिला प्रशासन के पास अपनी जानकारी दर्ज करानी होगी। इससे सुरक्षा और जवाबदेही तय होगी। साथ ही लिव-इन संबंधों से जन्म लेने वाले बच्चों को 'अवैध' नहीं माना जाएगा।

उन्हें कानूनी मान्यता और माता-पिता की संपत्ति में पूर्ण अधिकार मिलेगा। हिंदू जागरण मंच जैसे संगठनों का मानना है कि 'लव-जिहाद' और 'भूमि-जिहाद' जैसी समस्याओं पर लगाम कसने के लिए UCC एक प्रभावी हथियार साबित होगा।



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