10 साल बाद खुला पदोन्नति का ताला! PWD में नोटों की थैली और जांच फाइलों की जंग

Updated on 09-07-2026 09:01 PM

( *भोपाल मुख्यालय में DE के कमरे के बाहर लगी भीड़, 2 SE को मिली क्लीन चिट* )

       ( संजय रायजादा )

भोपाल। मध्य प्रदेश में 10 साल से लटकी पदोन्नति का ताला खुलते ही लोक निर्माण विभाग में भूचाल आ गया है। DPC की सूची जारी होते ही निर्माण भवन में "कुर्सी की लड़ाई" शुरू हो गई है। सबसे ज्यादा गहमागहमी उन सुप्रीटेंडेंट इंजीनियरों में है जो सालों से प्रभारी चीफ इंजीनियर और प्रभारी ENC बनकर विभाग चला रहे थे।

*डेढ़ दर्जन की लॉटरी, आधा दर्जन की मुश्किल*

मुख्यालय सूत्रों के मुताबिक PWD में करीब 18 SE, CE बनने की कतार में हैं। इनमें से अधिकांश का प्रमोशन तय माना जा रहा है। 

इनमें PIU के प्रभारी ENC एस आर बघेल, B&R के प्रभारी ENC आर एल वर्मा, MPRDC के प्रभारी ENC के पी एस राणा के साथ  चीफ इंजीनियर के पद के वेतनमान में पहुंचने के बावजूद प्रभारी चीफ इंजीनियर अथवा सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर के पद पर ही रह गए एस सी वर्मा, योगेंद्र बगोले, ए आर सिंह, के एस यादव, आनंद राने, वी पी बोरासी, ए पी सिंह, जिले सिंह बघेल सिंह, राजेश कागरा, गोपाल सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इनके खिलाफ कोई गंभीर जांच लंबित नहीं है।

*दागियों की दौड़ मंत्री के दरबार तक*

लेकिन असली खेल वहां है जहां जांच फाइलें खुली हैं। करीब आधा दर्जन SE पदोन्नति के लिए अब जुगाड़ में जुटे हैं। भोपाल में 90 डिग्री के पुल का "करिश्मा" दिखाने के आरोप में सस्पेंड होकर बहाल हुए संजय खांडे और जी पी वर्मा की विभागीय जांच अब भी लंबित है। वहीं इंदौर PIU के प्रभारी CE सुरेन्द्र राव गोरखड़े विभागीय जांच में फंसे हैं।

ग्वालियर के प्रभारी CE वी के अरक के खिलाफ भोपाल के छोला पुल पुल निर्माण में भ्रष्टाचार की जांच चल रही है। हाईकोर्ट के आदेश पर इंदौर में टेंडर निरस्त होने के मामले में जांच के दौरान ब्रिज CE पद से हटाए गए पी सी वर्मा और ग्वालियर में अस्पताल-पुल निर्माण घोटाले में विभागीय जांच में फंसे  भोपाल परिक्षेत्र CE पद से हटाए गए संजय मस्के की भी सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर से चीफ इंजीनियर पद पर पदोन्नति भी जांच के चक्कर में अटक गई है।

भोपाल हमीदिया अस्पताल निर्माण में भ्रष्टाचार और EOW छापे में आय से अधिक संपत्ति के मामले में अदालत में मुकदमा झेल रहे राज्य योजना आयोग में प्रभारी CE 6 एस एल सूर्यबंशी भी परमानेंट चीफ इंजीनियर बनने से चूक रहे हैं।

*फाइल साफ कराने का रेट तय*

विभाग में चर्चा है कि ये "दागी" अधिकारी दो रास्ते अपना रहे हैं। 

पहला - *मंत्री के दरबार में नोटों की थैली* लेकर पुराने कृत्यों पर पर्दा डलवाने की कोशिश। और दूसरा  *जांच अधिकारियों को खुश* करके लंबित विभागीय जांच को ठंडे बस्ते में डलवाना।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि 10 साल बाद पदोन्नति मिल रही है तो दांव भी बड़े लग रहे हैं। कुछ लोग तो 2-3 करोड़ तक का ऑफर लगाने की बात कर रहे हैं ताकि DPC में उनकी फाइल 'क्लीन' हो जाए।"

*DE के कमरे के बाहर थैलियों की लाइन!*

पदोन्नति का दौर शुरू होते ही निर्माण भवन का नजारा बदल गया है। विभागीय जांच देख रहे DE आफिसर संजय खांडे के कक्ष के बाहर भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे इंजीनियरों की लाइन लग गई है।  सभी अपनी विभागीय जांच की गंभीरता के आधार पर थैलियां" लेकर* पहुंच रहे हैं ताकि उनकी लंबित जांच किसी तरह खत्म हो जाए और DPC में नाम आ जाए।

        सूत्रों के मुताबिक इसी कवायद के तहत भ्रष्टाचार के मामलों में फंसे 2 सुप्रीटेंडेंट इंजीनियरों की विभागीय जांच* अचानक "खत्म" कर दी गई है जो वर्तमान में प्रभारी चीफ इंजीनियर के पद पर काम कर रहे हैं।अब उनके नाम भी पदोन्नति की रेस में शामिल हो सकते हैं। विभाग के प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह के निर्देश पर गोपनीय तरीके से उप सचिव राजेश शाह द्वारा आरोप मुक्त किए आदेश को गोपनीय रखा गया है लेकिन एस आर पत्रिका को इसकी कापी मिल गई है।

*AE से EE की सूची लौटी, 2 दर्जन को क्लीन चिट के आदेश*

पदोन्नति का असर निचले स्तर पर भी दिख रहा है। असिस्टेंट इंजीनियर से एक्जीक्यूटिव इंजीनियर के पद पर पदोन्नति के लिए तैयार की गई सूची को वापस लौटा दिया गया है। 

इसका मुख्य कारण सूची में शामिल करीब दो दर्जन अधिकारी ऐसे हैं जिनके खिलाफ विभागीय जांच लंबित थी लेकिन उनसे इसे खत्म कराने के लिए डील हो गई है 

अब निर्देश दिए गए हैं कि पहले इन सभी को विभागीय जांच से क्लीन चिट‌दिलवाई जाए, तभी अंतिम पदोन्नति सूची भेजी जाए।

*शासन के सामने धर्मसंकट*

सरकार के लिए ये परीक्षा है। एक तरफ 10 साल से रुकी पदोन्नति से कर्मचारियों में नाराजगी है। दूसरी तरफ भ्रष्टाचार के आरोपियों को प्रमोशन देने पर विपक्ष हमलावर होगा। 

PWD मंत्री और ENC कार्यालय के सामने सवाल है - क्या जांच लंबित होने के बावजूद "प्रभारी" के नाम पर सालों से कुर्सी संभाल रहे अधिकारियों को स्थाई चीफ बनाया जाए?

अब देखना है कि DPC की अंतिम सूची में "काबिलियत" जीतती है या "जुगाड़"। क्योंकि निर्माण भवन में हर फाइल के साथ एक थैली भी चल रही है।









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