मप्र में PWD मुख्य अभियंताओं के खाली पदों पर पदोन्नति टली; विभागीय जांच और गोपनीय रिपोर्ट की होगी कड़ी स्क्रूटनी

Updated on 17-07-2026 12:02 PM
भोपाल। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में अधीक्षण अभियंता (एसई) से मुख्य अभियंता (चीफ इंजीनियर) के पदों पर होने वाली पदोन्नति प्रक्रिया एक बार फिर अटक गई है। गुरुवार को प्रस्तावित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक स्थगित कर दी गई।

अब अधिकारियों के सेवा रिकॉर्ड, पिछले पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली (सीआर) और लंबित विभागीय जांचों की विस्तृत स्क्रूटनी के बाद नई तारीख तय की जाएगी।

विभाग में मुख्य अभियंता के 23 स्वीकृत पद हैं, जबकि 21 अधीक्षण अभियंताओं की पदोन्नति पर विचार होना है। फिलहाल पदोन्नति लंबित रहने के कारण अधिकांश वरिष्ठ पद प्रभार के आधार पर संचालित किए जा रहे हैं।

फोल्डरों की संख्या ज्यादा, नहीं हो पा रही जांच

सूत्रों के अनुसार, डीपीसी के समक्ष रखे जाने वाले फोल्डरों की संख्या अधिक होने और प्रत्येक अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड, विभागीय जांच तथा वर्ष 2020 से 2024 तक की सीआर का विस्तृत परीक्षण किए जाने के कारण बैठक टालनी पड़ी।

गहन जांच जारी

कमेटी यह भी जांच रही है कि अधिकारियों को मिली उत्कृष्ट ग्रेडिंग उचित कारणों और उपलब्धियों के आधार पर दी गई है या नहीं। नियमों के अनुसार डीपीसी कमेटी के पास रिकॉर्ड और प्रदर्शन के आधार पर मूल्यांकन में परिवर्तन करने का भी अधिकार है। इसी वजह से प्रत्येक फोल्डर की गहन जांच की जा रही है।

लंबित जांचों के कारण रुका काम

सीनियर क्लास-1 से सुपर क्लास-1 पदों के लिए होने वाली इस पदोन्नति प्रक्रिया में सबसे ज्यादा समय फोल्डर्स की जांच में लग रहा है। विभागीय नियमों के अनुसार, विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के समक्ष संबंधित अधिकारियों के खिलाफ चल रही सभी लंबित विभागीय जांचों की पूरी जानकारी रखी जाना अनिवार्य है। इसके साथ ही, हर अधिकारी के मूल सीआर (कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट) फोल्डर से पिछले पांच वर्षों की प्रविष्टियों का कड़ाई से मिलान किया जा रहा है।

5 साल की सीआर और उत्कृष्टता पर विशेष फोकस

कमेटी मुख्य रूप से वर्ष 2020 से वर्ष 2024 तक के पिछले पांच सालों के सीआर रिकॉर्ड खंगाल रही है। इस पूरी स्क्रूटनी में दो बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
सीआर ग्रेडिंग की सत्यता: फोल्डर में दर्ज की गई सभी जानकारियां पूरी तरह सही और प्रमाणित हैं या नहीं।
उत्कृष्टता का ठोस कारण: जिन अधिकारियों को 'उत्कृष्ट' ग्रेडिंग मिली है, उनके फोल्डर में स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए कि उन्हें यह ग्रेडिंग किस ठोस आधार या विशेष कार्य के लिए दी गई है। कमेटी बिना किसी ठोस कारण के लिख दी गई उत्कृष्ट ग्रेडिंग को गहराई से देख रही है।

डीपीसी कमेटी के पास है विशेष पावर

नियमों के मुताबिक, इस उच्च स्तरीय डीपीसी कमेटी के पास यह विशेष विवेकाधिकार (पावर) होता है कि वह अधिकारी के रिकॉर्ड और परफॉर्मेंस को देखते हुए उसका 1 नंबर घटा या बढ़ा सकती है। यही वजह है कि पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर एक फोल्डर की बारीकी से जांच की जा रही है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 29 August 2026
भोपाल, रीवा के गांधी स्मारक अस्पताल में 9 माह की गर्भवती कल्पना मिश्रा और उसके गर्भस्थ शिशु की इलाज के दौरान मौत हो गई। मौत से कुछ घंटे पहले कल्पना प्रसूति…
 29 August 2026
भोपाल, मध्य प्रदेश में जल्द ही करीब 10 हजार शिक्षकों की भर्ती निकलने वाली है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्कूल शिक्षा विभाग को भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं।…
 29 August 2026
भोपाल, राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष के मौके पर भोपाल में भारतीय संस्कृति और देशभक्ति का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। विविधा कलायम सांस्कृतिक समिति की ओर से 1…
 29 August 2026
भोपाल। भोपाल शहर के बीच 200 से अधिक राष्ट्रीय पक्षी मोरों के प्राकृतिक बसेरे को मोरों पर केंद्रित देश के सबसे बड़े एकीकृत बायोडायवर्सिटी पार्क की योजना तैयार की गई…
 29 August 2026
भोपाल। नेपाल स्थित प्रसिद्ध तीर्थ स्थल गोसाईकुंड की धार्मिक यात्रा पर गए एक ही कुनबे के 29 श्रद्धालुओं के अचानक आई भीषण बाढ़ (फ्लैश फ्लड) में लापता होने का हृदयविदारक…
 29 August 2026
 भोपाल। भोपाल सेंट्रल जेल ने शुक्रवार को रक्षाबंधन के लिए खास इंतजाम किए, जिसके तहत बहनें जेल परिसर के अंदर अपने भाइयों से मिल सकीं और उन्हें राखी बांध सकीं।…
 29 August 2026
भोपाल। राजगढ़ के ब्यावरा में पुल के तीखे मोड़ ने चार यात्रियों की जान ले ली। इस दुर्घटना ने राजधानी के ऐशबाग में बने करीब 90 डिग्री मोड़ वाले पुल…
 29 August 2026
भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस की ऐसी कोई भी नियुक्ति नहीं होती है, जिसे लेकर विवाद न हो। कई बार नियुक्ति निरस्त करनी पड़ती हैं तो कुछ को समायोजित करके…
 29 August 2026
भोपाल। महज 32,792 रुपये की वसूली का विवाद खत्म होने में 47 साल लग गए। वर्ष 1979 में एमपी स्टेट एग्रो और पीडी महेश्वरी के बीच शुरू हुआ यह मामला…
Advt.