
( संजय रायजादा )
भोपाल। लोक निर्माण विभाग में 20 जून को हुए औचक निरीक्षण ने विभाग के दावों की हवा निकाल दी। मंत्री राकेश सिंह और प्रमुख सचिव सुखवीर सिंह के निर्देश पर 7 जिलों में 35 निर्माण कार्यों की अचानक जांच कराई गई, और नतीजे चौंकाने वाले निकले।
मुख्य अभियंताओं के 7 दलों ने हरदा, डिंडौरी, अशोकनगर, धार, सिंगरौली, देवास और टीकमगढ़ में सड़क, पुल, भवन और NH के कामों को रैंडमली चुना। निरीक्षण में कुल 21 सड़क/पुल के काम, 5 PIU भवन, 6 MPRDC, 2 MPBDC और 1 NH प्रोजेक्ट चेक किए गए।
सबसे बड़ी फजीहत *धार जिले* में हुई। यहां MPRDC के मनावर-सिंघाना-कुक्षी मार्ग का काम PG के तहत चल रहा है, लेकिन सड़क की स्थिति "संतोषजनक नहीं" पाई गई। ठेकेदार मेसर्स एग्रोह इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुख्य अभियंता MPRDC को तुरंत कार्रवाई के निर्देश दे दिए गए।
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई समीक्षा बैठक की अध्यक्षता MPRDC के MD भरत यादव ने की। बैठक में प्रमुख अभियंता सड़क/पुल, MPRDC, भवन और BDC समेत सभी चीफ इंजीनियर, अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री ऑनलाइन मौजूद रहे।
बैठक में साफ कह दिया गया कि ब्लैकस्पॉट की समस्या के लिए तुरंत शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म प्लान बनाओ, और उसे धरातल पर उतारो। लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
अब सवाल ये है कि जब मंत्री और प्रमुख सचिव खुद औचक निरीक्षण करवा रहे हैं, तो फील्ड में गुणवत्ता कहां गायब हो जाती है? 35 में से कई कामों पर सवाल उठने के बाद PWD के अफसरों और ठेकेदारों में खलबली मची हुई है।
फिलहाल विभाग ने रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई के आदेश दे दिए हैं, लेकिन ग्राउंड जीरो की हकीकत देखकर लग रहा है कि कागजों पर चलने वाले विकास की पोल अब खुलनी शुरू हो गई है।