प्रमोशन पर रोक, ‘प्रभार’ से खेल – PWD में EE से सीधे CE बना दिए 3 इंजीनियर, नियमों की उड़ाई धज्जियां

Updated on 11-05-2026 05:14 PM


( इंदौर के प्रभारी CE पर फर्जी जाति प्रमाण पत्र का भी आरोप )

        ( संजय रायजादा )

भोपाल । मध्यप्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है। सरकार ने तब तक एक ‘जुगाड़’ निकाला और मौजूदा पद पर काम कर रहे अफसरों को एक पद ऊपर का प्रभार देने की छूट दे दी। मकसद था काम न रुके। 

      पर लोक निर्माण विभाग ने इस छूट को ‘बायपास रोड’ बना लिया। इस बात के सप्रमाण आरोप हैं कि विभाग के मंत्री राकेश सिंह, प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह और ईएनसी के पी एस राणा सीनियर इंजीनियरों को साइड लाइन करके  जूनियर इंजीनियरों को नियम तोड़कर दो पद ऊपर तक का प्रभार देने में जुटे हैं।

*EE से सीधे CE: तीन मिसाल*  

इन सप्रमाण आरोपों की पुष्टि करने के तीन उदाहरण तो सार्वजनिक है।नियमानुसार एक्जीक्यूटिव इंजीनियर (EE) को अधिकतम सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर (SE) का ही प्रभार मिल सकता है।  तीनों महारथियों ने PWD में तीन ऐसे EE को सीधे चीफ इंजीनियर (CE) का प्रभार दे दिया है जिनका ट्रेक रिकार्ड बेहद खराब है और जिन्हें विभाग में नोट छापने की मशीन कहा जाता है।

             इनमें सबसे पहला नाम एक्जीक्यूटिव इंजीनियर योगेंद्र कुमार  का है  जो हाल ही में  इंदौर के प्रभारी चीफ इंजीनियर बनाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी हासिल की है। वे जाटव जाति के हैं जो मध्यप्रदेश में आरक्षित नहीं है। लेकिन फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी पाने के बाद योगेन्द्र कुमार ने इस सरनेम का उपयोग करना बंद कर दिया ताकि उनकी असली जाति का किसी को पता नहीं चल सके। फर्जी जाति प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हथियाने वाले अधिकारियों कर्मचारियों की जांच के लिए बनाई गई राज्य सरकार की हाईलेवल कमेटी भी उनके जाति प्रमाण पत्र के फर्जी होने की पुष्टि कर चुकी है। 

      नियमानुसार ऐसे मामलों में सेवा समाप्ति तक की कार्रवाई का प्रावधान है। पर यहां कार्रवाई की जगह विदिशा में एक्जीक्यूटिव इंजीनियर रहने के दौरान विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव के के सिंह को सोने के बिस्कुट गिफ्ट करने को लेकर चर्चित हुए योगेंद्र कुमार को EE होने के बावजूद इंदौर CE का प्रभार दे दिया गया – यानी *दो पद की छलांग*।

EE होने के बाद भी ग्वालियर के प्रभारी CE के पद पर काबिज होने वाले दूसरे अधिकारी हैं वी.के. झा। एसडीओ से लेकर EE बनने तक सफर में कई अनियमितताओं की चादर लपेटे वी के झा पर भ्रष्टाचार के आरोप में फंसे छतरपुर के EE आशीष भारती और श्योपुर के सब इंजीनियर राकेश पाराशर से मोटा माल खाकर उन्हें अपनी जांच में क्लीन चिट देने का आरोप भी है। उन्हें विभाग की ट्रांसफर पोस्टिंग सिंडीकेट का सदस्य भी बताया जाता है जो संभावित ग्राहकों को लेकर आते हैं।

तीसरे नंबर पर हैं लटके झटके में माहिर रीवा के प्रभारी CE के.के. लच्छे। EE होने पर भी डिप्टी सीएम राजेन्द्र शुक्ला के गृहनगर में CE का

काम कर रहे लच्छे भी भ्रष्टाचार के दूध से धुले हुए हैं लेकिन विभागीय मंत्री, प्रमुख सचिव और ईएनसी की आंख का तारा बने हैं। उन पर लगे भ्रष्टाचार की फेहरिस्त बहुत लंबी है, लेकिन उनकी उस्तादी उन्हें  जांच और कार्रवाई की तलवार से बचाते हुए CE के पद की मलाई खिलवा रही है।

*प्रभार’ या ‘प्रमोशन का शॉर्टकट’?*  

GAD के साफ आदेश हैं कि प्रमोशन में आरक्षण का मामला सुलझाने तक एक पद ऊपर का प्रभार दिया जा सकता है, ताकि कोर्ट केस का असर काम पर न पड़े। पर PWD में इसे ‘आउट ऑफ टर्न प्रमोशन’ की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। 

विभाग के वरिष्ठ इंजीनियरों का कहना है कि इससे SE रैंक के दर्जनों अफसर जूनियर के अंडर काम करने को मजबूर हैं। मनोबल टूट रहा है, विभाग में गुटबाजी बढ़ रही है।

*सवालों के घेरे में मंत्रालय*  

1. जब GAD का आदेश ‘एक पद ऊपर’ का है, तो PWD ने ‘दो पद ऊपर’ का प्रभार किस नियम से दिया?  

2. फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आरोपी अफसर को CE का प्रभार देने के पीछे किसका ‘आशीर्वाद’ है?  

3. कोर्ट में प्रमोशन का केस लंबित होने का फायदा क्या सिर्फ ‘पहुंच वाले’ इंजीनियरों को मिलेगा?


*PSE एसोसिएशन में नाराजगी*  

प्रोजेक्ट इंजीनियर्स एसोसिएशन के एक पदाधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये प्रभार नहीं, प्रमोशन की ब्लैक मार्केटिंग है। जो चढ़ावा चढ़ाए, वो दो सीढ़ी फांद जाए।”


*सरकार का पक्ष बाकी*  

इस मामले में PWD मंत्री और प्रमुख सचिव से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, पर खबर लिखे जाने तक जवाब नहीं मिला। दोनो ने मीडिया से बचने के लिए मोबाइल फोन ना उठाने का नायाब तरीका चुना रखा है।

         फिलहाल, प्रमोशन का केस कोर्ट में है और ‘प्रभार’ का खेल PWD में। देखना है कि सरकार नियम का ‘एक पद’ याद रखती है या ‘दो पद’ की छूट का ठीकरा भी कोर्ट पर फोड़ दिया जाएगा।




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