भोपाल में सरकारी जमीनों पर सैटेलाइट की नजर, नए अतिक्रमण पर होगी तत्काल कार्रवाई

Updated on 02-07-2026 11:58 AM

भोपाल। जिले की शासकीय जमीनों को अतिक्रमण से सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन तकनीक आधारित भूमि प्रबंधन व्यवस्था लागू करने जा रहा है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद शहरी क्षेत्र में सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से लैंड सर्वे कराया जाएगा। इसके आधार पर 32 हजार एकड़ शासकीय भूमि का डिजिटल रिकार्ड तैयार होगा। सरकारी जमीन पर नए अतिक्रमण की सूचना मिलते ही पटवारी से सत्यापन कराया जाएगा और संबंधित एसडीएम तत्काल कार्रवाई करते हुए अवैध कब्जे हटाएंगे।

जानकारी के अनुसार, जिला प्रशासन ने शासकीय भूमि संरक्षण के लिए नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत कलेक्ट्रेट में विशेष राजस्व सेल का गठन किया जाएगा, जो सैटेलाइट तस्वीरों के माध्यम से सरकारी जमीनों की नियमित निगरानी करेगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद शासकीय भूमि पर होने वाले नए अतिक्रमण की जानकारी वास्तविक समय में प्रशासन तक पहुंचेगी, जिससे समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकेगी।

कलेक्टर ने सभी एसडीएम को अपने-अपने क्षेत्रों में शासकीय भूमि का सर्वे कर रिकार्ड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। जिन स्थानों पर सरकारी जमीनों को लेकर विवाद की स्थिति है, वहां डीजीपीएस मशीन से सीमांकन कराया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर जमीन की सुरक्षा के लिए तार फेंसिंग भी कराई जाएगी, ताकि दोबारा अतिक्रमण की संभावना समाप्त हो सके।

बड़े रकबे वाली सरकारी जमीनों की निगरानी होगी आसान

राजस्व अधिकारियों के अनुसार, बड़े रकबे वाली सरकारी जमीनों की निगरानी अब तक चुनौतीपूर्ण रही है। नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद पटवारियों को बार-बार मौके पर निरीक्षण के लिए नहीं जाना पड़ेगा। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर अतिक्रमण की पहचान तेजी से होगी और कार्रवाई भी समयबद्ध तरीके से की जा सकेगी। इससे सरकारी परियोजनाओं, अधोसंरचना विकास और अन्य सार्वजनिक कार्यों के लिए भूमि उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और सुगम बनेगी।

32 हजार एकड़ भूमि का बनेगा डिजिटल रिकॉर्ड

जिले में तैयार किए जा रहे लैंड बैंक के अनुसार अब तक 32 हजार एकड़ शासकीय भूमि चिह्नित की जा चुकी है। इनमें 22 हजार 250 एकड़ एक एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाली और 9 हजार 490 एकड़ एक एकड़ से कम क्षेत्रफल वाली भूमि शामिल है। इन सभी भूखंडों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। प्रशासन पहले से मौजूद अतिक्रमण हटाने के साथ नियमानुसार पुनर्वास योग्य मामलों में वैकल्पिक व्यवस्था पर भी काम करेगा।

इनका कहना है

कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने कहा कि शासकीय भूमि का संरक्षण जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। सैटेलाइट आधारित निगरानी प्रणाली लागू होने के बाद नए अतिक्रमण की जानकारी तत्काल मिलेगी। सत्यापन के बाद संबंधित एसडीएम कार्रवाई करेंगे। विवादित जमीनों का डीजीपीएस से सीमांकन कराया जाएगा और जरूरत पड़ने पर फेंसिंग कर भूमि सुरक्षित की जाएगी।



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