हमने कभी अयोध्या-मथुरा की कमेटियों में जगह नहीं मांगी

Updated on 06-07-2026 12:25 PM
भोपाल, मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के विरोध में सोमवार को राजधानी के बुधवारा चौराहे पर ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के पदाधिकारी और सदस्य प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से इस निर्णय को वापस लेने की मांग करते हुए कहा कि इससे मुस्लिम समाज की भावनाएं आहत हुई हैं।

ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के संरक्षक शमशुल हसन ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वक्फ मुस्लिम समाज की धार्मिक और सामाजिक संस्था है, जहां लोग अपनी संपत्ति अल्लाह की रजा के लिए वक्फ करते हैं। उनका कहना था कि वक्फ बोर्ड के प्रबंधन में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति उचित नहीं है।

जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड के गठन का आरोप

उन्होंने अयोध्या, सोमनाथ और मथुरा की धार्मिक संस्थाओं का उल्लेख करते हुए सवाल उठाया कि जब मुस्लिम समाज ने कभी उन संस्थाओं के प्रबंधन में प्रतिनिधित्व की मांग नहीं की, तो वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने की आवश्यकता क्यों महसूस की गई।

शमशुल हसन ने आरोप लगाया कि नए कानून के लागू होने के तुरंत बाद जल्दबाजी में वक्फ बोर्ड का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि यदि नए सदस्यों की नियुक्ति करनी ही थी, तो मुस्लिम समाज के योग्य और अनुभवी लोगों, जैसे सेवानिवृत्त आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य विशेषज्ञों को जिम्मेदारी दी जानी चाहिए थी।

CM के पोस्टर के साथ प्रदर्शन

प्रदर्शन के दौरान ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के कार्यकर्ता मुख्यमंत्री मोहन यादव के पोस्टर लेकर पहुंचे। उन्होंने पोस्टर पर वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति का विरोध जताते हुए इसे सरकार का हस्तक्षेप बताया। प्रदर्शनकारियों ने "वक्फ बोर्ड में तानाशाही नहीं चलेगी", "मनमानी नहीं चलेगी" जैसे नारे लगाए और सरकार से नए वक्फ बोर्ड के गठन पर पुनर्विचार करने की मांग की। इस दौरान अयोध्या समेत अन्य मंदिरों से जुड़े मुद्दों का भी जिक्र किया गया और सरकार के फैसले के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।

सरकार से आदेश वापस लेने की मांग

उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियां धार्मिक आस्था और समाज की अमानत हैं, इसलिए इनके प्रबंधन में ऐसे लोगों को शामिल किया जाना चाहिए, जिन पर समुदाय को विश्वास हो। उनका दावा था कि इस फैसले से मुस्लिम समाज में नाराजगी है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से आदेश वापस लेने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को प्रदेशभर में व्यापक रूप दिया जाएगा।



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