वॉशिंगटन: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत आज शनिवार 29 अगस्त को न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वॉयर गार्डन के इन्फोसिस थिएटर में संबोधन करेंगे। इस कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक छवि बनाने की मास्टर क्लास के तौर पर देखा जा रहा है। मोहन भागवत के इस कार्यक्रम में लगभग 5000 प्रवासी भारतीय शामिल होंगे, लेकिन इसके असल दर्शक सिर्फ वहां मौजूद लोग ही नहीं होंगे। अमेरिका में मौजूद लाखों भारतीयों की इस पर नजर है और वे इसे अपने स्मार्टफोन की स्क्रीन पर देख रहे होंगे, जहां इसी साल नवम्बर में मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं।विरोध के बाद चर्चा में न्यूयॉर्क कार्यक्रम
मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर हो रहे विरोध ने इस कार्यक्रम का राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अमेरिका में 60 से ज्यादा राजनीतिक और धार्मिक संगठनों ने इस कार्यक्रम का विरोध किया और इसे रोकने की मांग की। सड़कों से शुरू हुआ विवाद न्यूयॉर्क सिटी हॉल तक पहुंच गया, जब न्यूयॉर्क के पहले मुस्लिम और भारतवंशी मेयर जोहरान ममदानी ने इसका सार्वजनिक विरोध किया। ममदानी ने RSS को भेदभावपूर्ण ताकत बताया लेकिन साथ ही स्वीकार किया कि इस आयोजन को रद्द करना उनके अधिकार की सीमा में नहीं है।बात केवल विरोध तक ही नहीं रही। आयोजन से तीन दिन पहले आयोजन की मेजबानी करने वाले संगठन का X अकाउंट सस्पेंड कर दिया गया, जो कई घंटे बाद बहाल हुआ। आयोजकों का कहना है कि मास रिपोर्टिंग की वजह से ऐसा हुआ था।
सॉफ्ट हिंदू पावर की जीत
अब जब मोहन भागवत प्रवासी भारतीयों को संबोधित करेंगे तो इसका असर बंद दरवाजों तक सीमित नहीं रहेगा। इसका सबसे बड़ा असर डिजिटल दुनिया में देखने को मिल सकता है। RSS और बीजेपी के लिए यह कार्यक्रम बहुत बड़े प्रतीक के तौर पर होगा। ग्लोबल सिटी न्यूयॉर्क की सबसे मशहूर जगह से RSS प्रमुख का संबोधन महज एक कार्यक्रम नहीं होगा। यह एक राजनीतिक संदेश होगा कि बीजेपी-RSS की सोच ने हिंदू सभ्यता की पहचान को वैश्विक स्तर पर नई पहचान और मान्यता दी है। इसे भारतीय वोटर के सामने हिंदुत्व की सॉफ्ट पावर की जीत के रूप में पेश किया जा सकता है।