
IGL के मुताबिक, इस बार कीमत बढ़ाने की मुख्य वजह LNG की बढ़ती आयात लागत, अंतरराष्ट्रीय गैस कीमतों में तेजी और CNG की बढ़ती मांग है। इससे पहले मई में पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में तेजी के चलते IGL ने 10 दिनों के भीतर चार फेज में CNG के दाम कुल ₹6 प्रति किलो बढ़ाए थे।
नई कीमतों के बाद नोएडा और गाजियाबाद में CNG ₹95.59 प्रति किलो हो गई है। मेरठ में इसकी कीमत ₹95.47 और गुरुग्राम में ₹92.01 प्रति किलो है।
पेट्रोल और डीजल की तरह CNG के दाम भी अलग-अलग राज्यों में अलग होते हैं। इसकी एक वजह राज्यों में लागू अलग-अलग वैट दरें हैं।
दिल्ली में कीमत बढ़ने के बावजूद IGL ने कहा है कि CNG उपभोक्ताओं के लिए दूसरे ईंधनों के मुकाबले किफायती विकल्प बनी हुई है।
होर्मुज संकट से LNG की सप्लाई और कीमत पर असर
IGL ने बताया कि पश्चिम एशिया में संकट बढ़ने से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए LNG की सप्लाई और माल ढुलाई प्रभावित हुई है। संकट से पहले की तुलना में अब वैश्विक LNG कीमतें करीब दोगुनी हो गई हैं। यूरोप में सर्दियों से पहले गैस भंडारण बढ़ाने की जरूरत ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया है।
CNG की बढ़ती मांग से आयात पर निर्भरता बढ़ी
IGL के मुताबिक, भारत में CNG की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए इनपुट गैस का बड़ा हिस्सा आयातित स्पॉट LNG से पूरा किया जा रहा है। महंगी LNG और बढ़ती घरेलू मांग से IGL की इनपुट गैस लागत बढ़ी। इसी असर को कम करने के लिए कंपनी ने CNG के दाम ₹3.89 प्रति किलो बढ़ाए।
ऑटो-टैक्सी और माल ढुलाई पर पड़ सकता है असर
दिल्ली-NCR में बड़ी संख्या में ऑटो, टैक्सी, बस और माल ढोने वाले वाहन CNG से चलते हैं। ऐसे में ईंधन महंगा होने का असर इन वाहनों के संचालन खर्च पर पड़ सकता है।
CNG की कीमत बढ़ने से आगे चलकर यात्री किराए और माल ढुलाई की लागत पर भी असर पड़ने की संभावना है। खासकर उन लोगों और कारोबारों पर इसका ज्यादा असर हो सकता है, जो रोजाना CNG से चलने वाले वाहनों पर निर्भर हैं।
एशिया में LNG बेंचमार्क कीमत दोगुने से ज्यादा हुई
अंतरराष्ट्रीय बाजार में LNG की कीमतों में तेजी का अंदाजा एशिया के JKM बेंचमार्क से लगाया जा सकता है। इस साल फरवरी में इसकी कीमत करीब 11 डॉलर प्रति MMBTU थी, जो अगस्त में बढ़कर 23.4 डॉलर हो गई।
यूरोप के TTF गैस बेंचमार्क में भी इसी दौरान बड़ा उछाल आया। फरवरी में यह करीब 11.3 डॉलर प्रति MMBTU था, जो अगस्त में बढ़कर 23.3 डॉलर हो गया। इन वैश्विक कीमतों में तेजी का असर भारत में आयातित गैस की लागत पर भी पड़ा है।