इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने शुक्रवार को भारत से सिंधु जल संधि के तहत तकनीकी बातचीत और पानी से जुड़े डेटा को शेयर करने की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का आग्रह किया है। पाकिस्तान ने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते दबाव के कारण सहयोग और भी जरूरी हो गया है। खासकर तब जब नई दिल्ली ने 'एकतरफा तरीके से इस समझौते को स्थगित कर दिया था।'पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने वाशिंगटन में एक सेमिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने तीन-सूत्रीय तरीका बताया जिसमें 1960 की संधि को पूरी तरह से लागू करने और परमाणु हथियार रखने वाले इन पड़ोसी देशों के बीच विवादों को सुलझाने के लिए संधि में तय तरीकों का इस्तेमाल करने की बात कही। सेमिनार को वर्चुअली संबोधित करते हुए डार ने कहा 'पाकिस्तान और भारत को संधि के अनुसार तकनीकी बातचीत, पारदर्शिता और डेटा साझा करने की प्रक्रिया को फिर से शुरू और मजबूत करना चाहिए।'भारत ने कर दिया है सिंधु जल संधि को स्थगित
इशाक डार ने आगे कहा 'ये कोई अनुचित मांगें नहीं हैं। ये दो संप्रभु देशों के बीच गंभीरता से किए गए और छह दशकों से अधिक समय से चले आ रहे समझौते की जरूरतें हैं।' भारत ने अप्रैल 2025 में विश्व बैंक की मध्यस्थता वाली इस संधि को अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद स्थगित कर दिया था। इसमें पाकिस्तानी आतंकियों ने धर्म पूछकर 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या कर दी थी। भारत ने साफ कर रखा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते हैं।'
इशाक डार ने शुक्रवार को कहा कि समझौता 'वैध, बाध्यकारी और पूरी तरह से लागू' है। उन्होंने तर्क दिया कि छह दशकों से ज्यादा समय में युद्धों, सैन्य संकटों और राजनयिक संबंधों के टूटने के बावजूद इस संधि का बने रहना यह दिखाता है कि साझा जल संसाधनों को राजनीतिक तनाव से अलग रखना कितना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यह विवाद और भी जरूरी हो गया है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के कारण पाकिस्तान में पानी की आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है जबकि पाकिस्तान पहले से ही दुनिया के सबसे अधिक जल-संकट वाले देशों में से एक है।
सिंधु संधि को अंतर्राष्टीय मुद्दा बनाने की पाकिस्तान की कोशिश
इशाक डार ने इस विवाद को लेकर चिंता को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की कोशिश की और वाशिंगटन में हुई बैठक में कहा कि संधि की व्यवस्थाओं में एकतरफा दखलअंदाजी के नतीजे दक्षिण एशिया से कहीं आगे तक जा सकते हैं। पाकिस्तान आरोप लगा रहा है कि संधि को एकतरफा तौर पर रोकने का भारत का फैसला एक मिसाल बन सकता है और इससे दुनिया भर के उन देशों को चिंता होनी चाहिए जो नदी के बहाव की दिशा में नीचे की तरफ स्थित हैं। उन्होंने कहा 'इसलिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की दक्षिण एशिया में संधि-आधारित जल प्रबंधन को बनाए रखने में जायज दिलचस्पी है।'