दिल्ली में 80-100 गज के प्लॉट पर बिल्डर से फ्लैट बनवाने वालों के लिए बड़ी खबर, सरकार बदलेगी प्रॉपर्टी डील के नियम
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29-08-2026 12:36 PM
नई दिल्ली: दिल्ली में संपत्ति के बंटवारे और मालिकाना हक को लेकर होने वाले कानूनी विवादों को कम करने के लिए दिल्ली सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। नई व्यवस्था लागू होने पर, ऐसे किसी भी करार को सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत कराना होगा, जिस पर एक फीसदी शुल्क लागू हो सकता है।दरअसल, दिल्ली में विशेषकर 8O से 100 गज के छोटे प्लॉटों पर बिल्डरों द्वारा जमीन मालिकों के साथ मिलकर 3-4 मंजिला फ्लैट बनाने का बड़ा चलन है। अधिकतर बिल्डर और मालिक महज 50 या 100 रुपये के स्टांप पेपर पर ही आपसी समझौता कर लेते हैं। कई बार किसी फ्लोर के बदले नकद भुगतान की शर्तें भी होती हैं। ऐसे समझौतों से सरकार को राजस्व का नुकसान तो होता ही है, साथ ही भविष्य में आपसी विवाद भी बढ़ते हैंखरीदारों पर भी असर
अधिकारियों के अनुसार, एक्ट में प्रस्तावित बदलाव के बाद अब केवल स्टांप पेपर पर करार करना कानूनी रूप से पर्याप्त नहीं होगा। इस एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया तो बाद में फ्लैट की बिक्री के समय मुश्किलें आ सकती हैं। ऐसी स्थिति में बकाया करारनामे का शुल्क वसूला जाएगा, जिसका अतिरिक्त 1% भार खरीदार की जेब पर पड़ सकता है।
एक्ट में होगा बदलाव!
- कोलैबोरेशन एग्रीमेंट का रजिस्ट्रेशन होगा जरूरी, बढ़ेगी रजिस्ट्री की लागत।
- रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन की तैयारी, 1 फीसदी शुल्क क्सूल सकती है सरकार।
- मालिकाना हक के विवादों का हो सकेगा समाधान।
GPA से प्रॉपर्टी ट्रांसफर पर भी सरकार सख्त
दिल्ली सरकार जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए संपत्ति के ट्रांसफर को लेकर सख्त रुख अपना चुकी है। GPA के जरिए ब्लड रिलेशन के अलावा किसी बाहरी व्यक्ति को संपत्ति ट्रांसफर करने पर भी स्टांप ड्यूटी वसूली जा सकेगी। यह कलेक्टर ऑफ स्टांप तय करेगा कि कितना स्टांप शुल्क लिया जाना है। हालांकि, दिल्ली सरकार रजिस्ट्रेशन एक्ट में प्रस्तावित बदलाव के जरिए 4 फीसदी स्टांप शुल्क जीपीए पर लेने पर विचार कर रही है।