प्रॉपर्टी बेचने पर बचेगा ज्यादा टैक्स, इनकम टैक्स विभाग ने जारी किया फॉर्म्युला, किसे होगा फायदा?

Updated on 17-07-2026 01:20 PM
नई दिल्ली: इनकम टैक्स विभाग ने चालू वित्त वर्ष (2026-27) के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) बढ़ा दिया है। इसका इस्तेमाल जमीन-जायदाद (प्रॉपर्टी), शेयर और गहने बेचने पर होने वाले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स का हिसाब लगाने के लिए किया जाता है। टैक्स देने वाले लोग कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) का उपयोग तब करते हैं, जब उन्हें अपनी किसी पुरानी संपत्ति को बेचने पर हुए फायदे को महंगाई के हिसाब से जोड़कर देखना होता है।

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नोटिफिकेशन के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स 384 तय किया गया है। पिछले वित्त वर्ष (2025-26) में यह इंडेक्स 376 था। यह नया इंडेक्स नंबर 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होगा। जहां भी इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के तहत इंडेक्सेशन का फायदा मिलता है, वहां खरीद की लागत निकालने के लिए इसी नए इंडेक्स का इस्तेमाल किया जाएगा।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

एएमआरजी (AMRG) ग्लोबल के मैनेजिंग पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि इस इंडेक्स के बढ़ने से पता चलता है कि सरकार नई टैक्स व्यवस्था के तहत भी महंगाई के हिसाब से टैक्स छूट का लाभ (इंडेक्सेशन बेनिफिट) देने के लिए गंभीर है। उन्होंने बताया कि इससे टैक्स भरने वालों, वैल्यू निकालने वालों और टैक्स प्रोफेशनल्स को मुनाफे का सही हिसाब लगाने में आसानी होती है और आपसी विवाद भी कम होते हैं।

जब कोई संपत्ति बेची जाती है, तो उसे खरीदने की पुरानी कीमत को आज की महंगाई के हिसाब से जोड़ने के लिए इस इंडेक्स का इस्तेमाल होता है। इसे इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन कहा जाता है। किसी संपत्ति पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) तब माना जाता है जब उसे एक तय समय से ज्यादा समय तक पास रखा गया हो। सामान्य संपत्तियों के लिए यह समय 36 महीने से ज्यादा है, वहीं जमीन-जायदाद और अनलिस्टेड शेयरों के लिए 24 महीने और शेयर बाजार में लिस्टेड सिक्योरिटीज के लिए 12 महीने का समय तय है।

क्या है कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII)?

इसका इस्तेमाल लंबी अवधि की संपत्ति (घर या जमीन) की महंगाई-पर आधारित लागत निकालने के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, अगर आपने 20 साल पहले कोई प्रॉपर्टी 20 लाख रुपये में खरीदी थी और उसे इस साल बेचा है, तो उसकी इंडेक्स्ड कॉस्ट (महंगाई जोड़कर निकाली गई कीमत) ज्यादा होगी।

चूंकि टैक्स साल 2026-27 के लिए CII 384 है, जो कि 2025-26 के 376 से ज्यादा है। इससे इस साल बेची गई संपत्तियों की खरीद लागत ज्यादा मानी जाएगी, जिससे टैक्स वाला मुनाफा कम हो जाएगा। यह तरीका सिर्फ उन्हीं संपत्तियों पर काम करता है जहां इंडेक्सेशन की सुविधा मिल रही है। इंडेक्सेशन का फायदा कुछ खास संपत्तियों पर ही है।

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